महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय में एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन पर दो दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न
जैविक खेती और पर्यावरण अनुकूल फसल सुरक्षा पर दिया गया जोर, विद्यार्थियों को जैव-एजेंट्स के उत्पादन का मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण
गोरखपुर, 03 नवंबर 2026। जैविक एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने और फसलों को कीटों से सुरक्षित रखने की आधुनिक तकनीकों से विद्यार्थियों को परिचित कराने के उद्देश्य से महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, गोरखपुर में एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन पर आयोजित दो दिवसीय उन्मुखीकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ।
केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र, गोरखपुर एवं महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कृषि संकाय के संयुक्त तत्वावधान में 02 एवं 03 नवंबर को आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का विषय 'जैविक खेती पर विशेष जोर देते हुए एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन तकनीकों का डिजिटलीकरण एवं जैव-एजेंट्स के बड़े पैमाने पर उत्पादन हेतु प्रयोगशाला प्रोटोकॉल' रहा। कार्यक्रम कृषि संकाय के अधिष्ठाता डॉ. विमल कुमार दुबे के मार्गदर्शन तथा कृषि कीट विज्ञान की सहायक आचार्य डॉ. सास्वती प्रेमकुमारी के नेतृत्व में आयोजित हुआ। इसमें बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जैविक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना, रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करना तथा जैव-एजेंट्स के उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण और प्रभावी उपयोग के संबंध में विद्यार्थियों को वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराना था।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान सहायक पादप संरक्षण अधिकारी श्री अवधेश कुमार ने एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन के सिद्धांतों, संगरोध तथा कीटनाशकों के सुरक्षित उपयोग के बारे में जानकारी दी। सहायक पादप संरक्षण अधिकारी श्री मनोज कुमार शुक्ला ने जैविक नियंत्रण एवं जैव आधारित नाशीजीव प्रबंधन के महत्व को विस्तार से समझाया।
वहीं वैज्ञानिक सहायक श्री मोनल कुमार सिंह ने भूमि की तैयारी, फसल चक्र, बीज उपचार, पोषक तत्व प्रबंधन, सिंचाई एवं खरपतवार नियंत्रण जैसी महत्वपूर्ण कृषि प्रक्रियाओं की जानकारी दी। श्री रत्नेश कुमार मिश्रा ने फेरोमोन ट्रैप, पीले एवं नीले स्टिकी ट्रैप तथा यांत्रिक नाशीजीव प्रबंधन तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
इसके अतिरिक्त वैज्ञानिक सहायक सुश्री श्वेता श्री ने ट्राइकोडर्मा हार्जियानम एवं ब्यूवेरिया बेसियाना जैसे जैव-एजेंट्स के बड़े पैमाने पर उत्पादन की वैज्ञानिक विधियों और प्रयोगशाला प्रोटोकॉल से विद्यार्थियों को परिचित कराया।
कार्यक्रम में डॉ. विमल कुमार दुबे मुख्य अतिथि एवं श्री राहुल मिश्रा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर डॉ. सास्वती प्रेमकुमारी (सहायक आचार्य, कृषि कीट विज्ञान), श्री अनुज पाण्डेय (कनिष्ठ शोध सहायक) सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
दो दिवसीय प्रशिक्षण के समापन पर विद्यार्थियों ने पर्यावरण अनुकूल फसल सुरक्षा, जैविक कीट नियंत्रण और आधुनिक एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया। इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को कृषि शिक्षा और टिकाऊ खेती की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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